Home मध्यप्रदेश नोटबंदी से इंदौर में 80 प्रतिशत श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट

नोटबंदी से इंदौर में 80 प्रतिशत श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट

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इंदौर। 1000-500 रुपये के नोट बंद होने का असर निर्माण कार्यों पर पड़़ऩे के बाद इस काम में लगने वाले श्रमिकों व उनके परिवार वालों के सामने संकट की स्थिति निर्मित होने लगी है। 10 नवंबर के बाद से इन श्रमिकों को काम मिलना पूरी तरह बंद हो गया है जिसके कारण वे परिवार के पालन-पोषण के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। श्रमिकों को काम दिलाने वाले ठेकेदार भी गायब हैं।

इंदौर से 80 प्रतिशत तक मजदूर बेरोजगार हो गए है और उनके सामने एक बहुत बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। 1000-500 के नोट बंद करने की घोषणा के दो दिन बाद से ही रियल एस्टेट का कारोबार ठंडा पड़ने लगा। इस कारोबार का असर जहां प्रापर्टी ब्रोकरों व बिल्डरों पर पड़ा, वहीं सबसे ज्यादा असर निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों पर दिखाई दिया। नोटबंदी के दो दिन बाद से ही निर्माण कार्य बंद हो गए, जिससे हजारों श्रमिकों को काम मिलना बंद हो गया और उनके सामने रोजी-रोटी के लाले पड़ गए।

शहर में बहुत से ऐसे श्रमिक हैं, जो बाहर से अपने परिवार सहित यहां आए हैं। ऐसे मजदूर जो रोज कमाते और रोज खाते हैं, रोजगार नहीं मिलना बड़ा संकट है। इस कारण परिवार का पेट पालना भी मुश्किल होने लगा है। आमतौर पर निर्माण कार्यों में काम करने वाले श्रमिकों को 300 रुपये प्रतिदिन तक मजदूरी दी जाती थी। हालांकि ठेकेदारों द्वारा बिल्डरों से इनके नाम पर 500 रुपए तक वसूल किए जाते थे और उनको 300 रुपये देकर 200 रुपये कमिशन के रूप में वह खुद रखते हैं। अब काम बंद होने से यह श्रमिक 200 रुपये या उससे कम तक मजदूरी करने के लिए तैयार हैं। आम तौर पर हर रोज ये श्रमिक सीतलामाता बाजार, पाटनीपुरा, सुभाष नगर, कालानी नगर, बजरंग नगर सहित छह स्थानों पर काम के लिए यह मजदूर सुबह खड़े होते हैं। कुछ मजदूरों ने बताया कि कई जगह हमें काम तो मिल रहा है लेकिन काम कराने वाले पुराने 1000-500 के नोट देने को तैयार हैं। इससे मजदूरों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वैसे बड़ी संख्या में मजदूर सुबह घर से काम की आस में टिफिन लेकर निकल तो रहे हैं लेकिन दो से तीन घंटे तक खड़े रहने के बावजूद उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है। धूप चढ़ऩे के बाद यह मजदूर घर से लाया टिफिन लेकर वापस घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।

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