Home धर्म-अध्यात्म लग्नों के प्रभाव के कारण आते हैं जीवन में उतार-चढ़ाव

लग्नों के प्रभाव के कारण आते हैं जीवन में उतार-चढ़ाव

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ज्योतिषशास्त्र में लग्नों का विशेष महत्व बताया गया है। इनके कारण व्यक्ति के जीवन में अनेक तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। जन्म के बाद जीवन के प्रति विभिन्न लग्नों का योगदान अपने अपने अनुसार महत्व रखता है। जन्म समय से जन्म लगन,राशि के लिये चन्द्र लगन,द्रश्य संसार के लिये सूर्य लगन,जीवन मे आने का प्रभाव कारकांश लगन जीवन साथी और जीवन की लडाई के लिये देखी जाने वाली नवमांश की लगन को अधिक प्रयोग मे लिया जाता है।

लगनेश का साथ मंगल के साथ होने से जातक को तकनीकी बात करने वाला भी कहा जा सकता है लगनेश के साथ चन्द्रमा के होने से जागक को जनता के अन्दर अपने को तकनीकी कार्यो व्यापार आदि के लिये भी समझा जा सकता है। अष्तमेश मंगल है,तथा तृतीयेश भी मंगल है,मंगल का साथ लगनेश के साथ होना जातक के लिये एक प्रकार से दुखदायी माना जा सकता है।

मंगल वैसे अमंगल नही करता है लेकिन जब मंगल का साथ बुध के साथ हो जाता है तो जातक के अन्दर अपने कार्य या व्यवहार के समय तकनीकी बाते बनाकर कार्य करने के लिये माना जा सकता है,यह कार्य व्यवहार उन लोगों को बहुत अधिक अखरता है जो सीधे सच्चे लोग होते है और अपने को कपट आदि से दूर रखकर अपने कार्यों को समाज हित के लिये किया करते है।

लगनेश से तीसरे भाव मे शुक्र के होने से और शुक्र का कुंडली मे बारहवे भाव मे होने से जातक की दिमागी स्थिति को अधिक धार्मिक भी माना जा सकता है,जातक की रोजाना की जिन्दगी मे धर्म के प्रति अपनी आस्था को भी रखना जाना जा सकता है। लगनेश को बल देने वाले ग्रहों में मंगल चन्द्र और शनि है। इस प्रकार से जो प्रभाव लगन और लगनेश को मिलते है वह इस प्रकार से है:-

लगन:-कन्या लगन राशि से बुध का प्रभाव.

लगन:- कन्या लगन ग्यारहवे राहु का प्रभाव

लगन:- कन्या लगन दसवे मंगल का प्रभाव.

लगन:- कन्या लगन पंचम केतु का प्रभाव

लगन:- कन्या लगन गुरु का लगन मे उपस्थिति का प्रभाव

लगन कन्या लगन शनि का लगन मे उपस्थिति का प्रभाव

इस प्रकार से लगन को बल देने वाले ग्रह -बुध,राहु मंगल केतु गुरु शनि.

जातक के पास शरीर बल में बोलने की कला बुध से,धार्मिक व्यक्ति होने का आभास गुरु से,कार्य के अन्दर अधिक मेहनत करने का प्रभाव शनि से लाभ तथा अनन्य कार्यों के लिये बल देने वाला छाया ग्रह राहु सन्तान का भाव देने वाला ग्रह केतु को माना जायेगा.

इस भावना मे जातक के लिये बुध राहु कम्पयूटर और सोफ़्टवेयर आदि मे निपुण,मंगल के साथ मिल जाने से तकनीकी कार्यों मे दक्ष,गुरु के मिल जाने से धन और बचत आदि के कार्यों की जानकारी,शनि के साथ मिल जाने से बडे संस्थानो के प्रति मेहनत करने वाले कार्यों के लिये अपनी युति को प्रदान करने वाला माना जाता है.इसी प्रकार से शरीर की बनावट के लिये गुरु शनि से गेहुआं रंग मंगल के द्वारा प्रभाव देने से अस्पताली कारणो से अधिक जूझने वाला और रोजाना के कार्यों के अन्दर कोई न कोई दिक्कत का आना,गुरु के साथ मंगल का कन्ट्रोल करने का भाव जाति से घर सजाने और जंगली उत्पादन आदि से सजावट के कार्यों को करने वाला माना जाता है.

चन्द्र लगन को भी प्रभाव देने वाले ग्रहों में लगन की राशि से बुध बुध का उपस्थिति होना बुध का डबल योगदान,मंगल का साथ होना चन्द्रमा का साथ होना शनि के द्वारा दसम द्रिष्टि से चन्द्र लगन को बल देना माना जाता है। इस प्रकार से जातक की सोच आदि के लिये कमन्यूकेशन लोगो से मिलने जुलने और बातों के व्यापार से धन कमाने के कारण पैदा करना शनि गुरु के आपसी योगदान से जातक का कार्य करने का भाव प्राइवेट कम्पनी आदि मे धन की सार सम्भाल करना और केतु का अष्टम मे होना ब्रोकर जैसे कामो का करना होता है,

केतु की युति शनि गुरु से होने से लोगो को वाहनो घरो और व्यापार के लिये धन आदि को प्राप्त करवाना आदि माना जाता है। राजकीय परिक्षेत्र मे भी जातक की रुचि अधिक होना माना जा सकता है तथा बडे बडे भवनो की सार संभाल करने का कारण भी इसी लगन से देखा जा सकता है।

सूर्य लगन पर जो जातक के लिये द्रश्य भाव को पैदा करता है और जातक की स्थिति को समाज मे प्रदर्शित करता है से लगन कर्क राशि की होने से चन्द्रमा का प्रभाव सूर्य का लगन मे होना सूर्य का प्रभाव राहु के स्थापित होने के कारण तथा राहु के द्वारा शनि गुरु केतु पर प्रभाव देने से जातक को या तो गृहस्थ सुख या धन दोनो मे से एक को ही प्रकट करने वाला माना जाता है,केतु का प्रभाव भी लगन पर होने से जातक को पिता के लिये ननिहाल या इसी प्रकार की जायदाद का मिलना या पिता को किसी राजकीय कार्य से धन का मिलना जो शनि के मृत्यु स्थान का कारक होने से और मंगल के प्रभाव से पेंसन आदि का मिलना और जरूरत पर पिता के पैसे का प्रयोग करना आदि भी माना जाता है।

इस लगन से तीसरे भाव मे शनि होने से जातक के पिता के लिये और पूर्वज परिवार के लिये एक पूर्वजो का बनाया गया मकान भी माना जाता है और पिता तथा पिता के भाई आदि की बसावट से पूर्ण भी माना जाता है,सूर्य से बारहवे भाव मे मंगल बुध और चन्द्र के होने से जातक की बुआ बहिन आदि के लिये उनके पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन आदि जातक के पिता के द्वारा ही किया जाता है और जातक की पैदाइस के स्थान से बुआ बहिन आदि का रहने वाले स्थान से दक्षिण-पूर्व दिशा मे स्थापित होने का कारण भी जाना जाता है तथा अधिकतर मामले मे जातक की बोलचाल के कारणो मे जातक कमन्यूकेशन के क्षेत्र मे सरकारी संस्थानो के प्रति कार्य करना भी माना जाता है.

इस लगन पर असर देने वाले ग्रह सूर्य राहु चन्द्र केतु ही है। तथा इन सभी ग्रहों के आपसी सहयोग से जो धारणा बनती है वह जातक के पिता परिवार और पूर्वजों के परिवार का अन्यत्र से आगमन भी माना जाता है और अपनी जाति आदि के लिये भी किसी प्रकार का बदलाव करने या नाम परिवर्तन का योग भी माना जाता है।

नवांश की कुंडली को जीवन साथी के लिये भी देखा जाता है और जीवन मे लडी जाने वाली लडाइयों के लिये भी जाना जाता है जीवन की जद्दोजहद भी इसी कुंडली से देखी जाती है। प्रस्तुत कुंडली मे असरकारक ग्रह लगन को राशि से गुरु स्थान से केतु लगनेश को शनि और मंगल मंगल को असर देने वाले ग्रह राहु के साथ शुक्र का कारण भी देखा जा सकता है। बुध जो बातों के व्यापार के लिये भी जाना जाता है जो सूर्य और चन्द्र से युति रखने के कारण उन्ही संस्थानो मे सफ़ल होने के कारण देखता है जो वाहन जमीनी काम बैंक और फ़ाइनेन्स वाले काम सरकारी संस्थाओ के बेलेन्स करने वाले काम आदि माने जाते है इस लगन मे अक्सर धर्म से जुडा क्षेत्र भी देखा जाता है

जैसे इस लगन मे धर्म का कारक ग्रह मंगल है लेकिन मंगल ग्रह वृश्चिक राशि का मालिक होने और यही राशि धर्म मे स्थापित होने के लिये जातक अटूट श्रद्धा मंगल के देवता हनुमान जी पर रखने वाला होगा लेकिन मंगल का उच्च राशि मे होने से और राहु की युति मंगल से होने के कारण जब तक जातक धर्म के देवता से अपनी युति को बनाकर चलता रहेगा तब तक उसके लिये कोई भी काम सफ़लता से रोकने मे कामयाब नही होगे,

लेकिन जैसे जातक मंगल और शुक्र की आमने सामने की युति से प्यार मोहब्बत या कबूतर बाजी के चक्कर मे आयेगा यह मंगल अपनी युति से जातक के गुरु और शनि दोनो को राहु के प्रभाव से प्रताणित करने लगेगा जातक को शरीर की चोटो या बीमारी से भी ग्रस्त कर देगा और जातक केपास आने वाले धन को भी अपनी युति से बन्द कर देगा।

जातक दो कामो से एक काम को ही मान्यता दे सकता है या तो वह हनुमान जी को मानता रहे या शुक्र के साथ केतु की युति वाली मे शाकिनी दोष से पीडित होकर अपने जीवन को बरबाद करता रहे,इस युति मे जातक अगर अपने माता पिता या समाज वाली स्थिति से शादी विवाह को रूप देता है तो यह शाकिनी दोष की सीमा से बाहर हो जाता है और यह मंगल जो उच्च की स्थिति मे राहु के साथ मिलकर अपनी युति को लाभ वाले स्थान मे दे रहा है वह जीवन की उन्नति मे जा सकता है।

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