सिंचाई व्यवस्था पर भारी पड़ रही बिजली कंपनी की कार्रवाई
By dsp bpl On 3 Nov, 2016 At 10:40 AM | Categorized As Uncategorized | With 0 Comments

lightगुना। करे कोई भरे कोई की तर्ज पर कुछ लोगों द्वारा बिजली बिल का भुगतान नहीं करने के बाद बिजली विभाग ने पूरे गांव की ही बिजली बंद कर डाली हैं। हालात यह हो गए हैं कि बिजली बंद होने से दिनचर्या के अलावा किसानों के सामने सिंचाई जैसी महत्वपूर्ण सुविधा एनवक्त पर बंद हो गई।

कई गांवों में तो हालात जरूरत से ज्यादा खराब हैं। यहां महीनों से बिजली बंद होने की वजह से रबी फसलों की बोवनी प्रभावित हो गई है। लोगों ने दीपक और लालटेन की रोशनी में दीपावली जैसा पर्व मना लिया। इसके पहले कई गांवों में नवरात्र और दशहरे का पर्व भी लालटेन की रोशनी में ही मना लिया गया। कुछ लोगों द्वारा बिजली बिल न भरने से पूरे गांव को अंधेरे में रहने की मजबूरी बन गई है। इस मामले में विद्युत विभाग के अधिकारी और बिल न भरने वाले ग्रामीणों के बीच कोई सुलह नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ रहा है। बिजली न होने से लोगों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही है। इसका स्थाई निदान नहीं निकल पा रहा।

विभाग नहीं कर रहा पहल
जिन गांवो में बिजली बिल न भरने के कारण बिजली काट दी गई है यहां विभाग उचित पहल नहीं कर रहा है। इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। रूठियाई से सटे आधा दर्जन गांवों की तो बिजली पूरी तरह बंद कर दी गई जब शिकायतें हुई तो 10 दिन बाद बिजली सप्लाई शुरु हो सकी। इसके अलावा विभाग द्वारा पहल कर जिन उपभोक्ताओं ने बिजली बिल नहीं भरा है उनसे कुछ राशि लेकर बिजली शुरू की जा सकती थी। ऐसी स्थिति में शेष राशि उपभोक्ता बिजली जोडऩे के बाद आसानी से दे सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

फसलों की सिंचाई हो रही प्रभावित
गांवों में बिजली नहीं होने के बाद सबसे अधिक परेशानी किसानों को सिंचाई करने में हो रही है। मांग और आपूर्ति में अंतर कम होने के बाद पिछले कुछ माह से ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती में काफी कमी आई है। इसी वजह से बिजली के सहारे सिंचाई करना किसानों के लिए आसान था, लेकिन कई गांवों में बिल न भरने की वजह से बिजली काट दी गई है। अब ऐसे गांवों के किसानों का दुबले पर दो आषाढ़ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। संपन्न किसान तो डीजल पंप के सहारे आसानी से अपने खेत में सिंचाई कर रहे हैं भले ही डीजल महंगा हो किन्तु खेती में वे किसी भी तरह का समझौता नहीं कर रहे हैं। गरीब किसानों के सामने डीजल पंप से सिंचाई करने की समस्या है।

एक साल से अंधेरे में मुहालपुर कालोनी  
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी की लापरवाही के चलते ग्राम मुहालपुर के कालोनीवासी एक साल से अंधकार में ही अपना जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीण इस बीच बिजली कंपनी दफ्तर के चक्कर लगा लगाकर पूरी तरह थक चुके हैं।  खास बात तो यह है कि बगैर बिजली के उनके पास बिल भी भेजे जा रहे हैं। इन बिलों की भी ग्रामीणों ने एवरेज राशि चुकता कर दी है। इसके बाद वह ग्रामीण विद्युत मंडल के महाप्रबंधक से मिले उन्होंने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया और कह दिया कि इसके लिए आप ग्रामीण डीई से मिलो। इससे ग्रामीण लोगों का मोह भंग हो गया कि अब वह शिकायत करने जाएं तो कहां जाएं। जब महाप्रबंधक ही ग्रामीणों की शिकायत प्रमुखता से हल नहीं कर पा रहे। इससे तो ऐसा लगता है कि महाप्रबंधक अमिता तिवारी भी अपने विभाग का मैनेजमेंट करने में नाकाम साबित हो रही हैं।

ट्रांसफार्मर रखवाया, नहीं लगाए मीटर
ग्रामीणों ने चक्कर लगा लगाकर जैसे-तैसे राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बीपीएल परिवारों के लिए ट्रांसफार्मर रखवा लिया है। इसके बाद विभाग ने उनसे पिछले बिलों की राशि भी आश्वासन देकर जमा करा ली है और अब उन्हें तीन माह से सिर्फ मीटर कनेक्शन लगवाने के लिए परेशान किया जा रहा है। विभाग के कारिंदों को इतनी फुर्सत नहीं है कि जब ग्रामीणों ने बगैर बिजली जलाए बकाया राशि जमा कर दी तो कम से कम उनके घरों में मीटर कनेक्शन ही लगा दे। इस तरह विभाग के अफसर सहित गोकुलसिंह चक स्थित ग्रामीण फीडर के प्रबंधक जेई ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इस कदर बेवकूफ बना रहे हैं कि लोगों ने अंधेरे में ही दीपावली को मनाना पड़ा।

अंधकार में ही गुजरी दीपावली
एक साल से लाईट जलाने को आतुर ग्रामीण कालोनीवासियों ने एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया। इसके बाद वह सभी के सभी विभाग के चक्कर लगाते लगाते थक हारकर घर बैठ गए हैं। इसके बाद भी इन ग्रामीणों की किसी ने भी एक नहीं सुनी और  अब उनका पूरी तरह मोह भंग हो गया है। विभाग की कार्यप्रणाली पर उन्होंने प्रश्न चिन्ह लगाया है कि विभाग में उच्च पदों पर पदस्थ अफसर जमकर योजनाओं का पलीता लगा रहे है और वे शासन-प्रशासन के नियमों को धता बता रहे हैं। इसी का परिणाम है कि आज उन्होंने रोशनी के त्योहार दीपावली को भी अंधेरे में ही मनाई।

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