गोविंदाचार्य ने PM पर साधा निशाना, कहा-मोदी चुप रहना सीख रहे हैं
By dsp On 27 Jun, 2015 At 06:21 PM | Categorized As भारत | With 0 Comments
0272_1435400813नई दिल्ली. राजनीतिक विचारक केएन गोविंदाचार्य ने बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने पार्टी पर नैतिकता से मुंह मोड़ने का आरोप लगाया है। गोविंदाचार्य ने कहा है कि ललित मोदी कांड में फंसे बीजेपी के सभी मंत्रियों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। गोविंदाचार्य ने कहा कि सरकारें भले ही दांवपेंच से चलती हों, लेकिन समाज नैतिकता से चलता है। अपने मंत्रियों पर बीजेपी की कार्रवाई ऐसी देखाई दे रही है जैसे दांवपेंचों के जरिए उन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है। गोविंदाचार्य ने इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे भी चुप रहना सीख रहे हैं। गोविंदाचार्य ने शनिवार को एक टीवी चैनल से बातचीत में यह बात कही।
‘सरकार के इकबाल को कम कर रहे हैं नरेंद्र मोदी’
गोविंदाचार्य ने कहा कि ललित मोदी कांड में फंसे मंत्रियों को बचाने की कोशिश केंद्र की मोदी सरकार का जनता के बीच इकबाल कम कर रही है। उन्होंने कहा कि अभी सरकार की तरफ से न्याय को नैतिकता से अलग करने की कोशिश हो रही है। जबकि न्याय को नैतिकता से काटकर नहीं देखा जा सकता।
मंत्रियों को अपने आप दे देना चाहिए इस्तीफा
गोविंदाचार्य ने ललित मोदी मदद विवाद पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी निशाना साधा। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि लगता है कि प्रधानमंत्री अब चुप रहना सीख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मसला ऐसा है, जिसमें प्रधानमंत्री को अपने मंत्रियों से इस्तीफा मांगने की ज़रूरत ही नहीं पड़नी चाहिए बल्कि ये इस्तीफे खुद ही नैतिकता के आधार पर होने चाहिए। लाल बहादुर शास्त्री का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे तो उन्होंने खुद ही नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया था ना। किसी ने उनका इस्तीफा नहीं मांगा था।’
‘लोकतंत्र में संवाद और विश्वास-दोनों जरूरी’
मोदी सरकार को नसीहत देते हुए गोविंदाचार्य ने कहा, ‘कई लोगों में यह मैसेज जा रहा है कि सरकार में टीम भावना कमजोर हो रही है। संस्थाओं को कमज़ोर किया जा रहा है। सरकार में बैठे लोग सीएजी का मखौल उड़ा रहे हैं और लोकपाल पर ढिलाई बरती जा रही है।’ उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि लोकतंत्र में संवाद और विश्वास दोनो बेहद जरूरी हैं।

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