NJAC में मोदी सरकार ने कांग्रेस की नकल कर ली: नरीमन
By dsp On 19 Jun, 2015 At 10:24 AM | Categorized As भारत, राजधानी | With 0 Comments

समन्यव रतूड़ी, नई दिल्ली

Source: www.navbharattimes.indiatimes.com (इकनॉमिक टाइम्स)
fali-s-nariman
सीनियर वकील और संविधान विशेषज्ञ फली एस. नरीमन ने कहा है कि सरकार ने नैशनल जूडिशल अपॉइंटमेंट्स कमिशन (एनजेएसी) पर अलग से सोचने-विचारने के बजाय कांग्रेस के बिल की कॉपी कर ली। नरीमन उन कानूनविदों में शामिल हैं, जो ऊपरी अदालतों में जजों की भर्ती के इस नए सिस्टम के खिलाफ हैं। सरकार ने ऊपरी अदालतों में जजों की भर्ती के लिए कॉलेजियम सिस्टम को बदलकर एनजेएसी बनाया है। सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच कमिशन से जुड़े दोनों कानूनों की संवैधानिक वैधता के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ऐडवोकेट्स ऑन रेकॉर्ड असोसिएशन (एससीओआरए) की तरफ से नरीमन ने कहा, ‘इस सरकार ने कांग्रेस के बिल की कॉपी कर ली। अगर उन्होंने अपना दिमाग लगाया होता, तो एनजेएसी के प्रावधान काफी बेहतर होते।’ जस्टिस जे. एस. खेहर, जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस मदन बी. लोकुर, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस आदर्श कुमार गोयल वाली पांच जजों की बेंच एनजेएसी को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रही है।

नरीमन ऐसे प्रावधान का जिक्र कर रहे थे, जो सलाह-मशवरे की प्रक्रिया में 6 सदस्यों वाले एनजेएसी में किसी दो लोगों को वीटो पावर देगा। उन्होंने कहा कि प्रक्रिया से जुड़ा वीटो जरूरी सलाह-मशवरे की प्रक्रिया को खारिज या नजरअंदाज नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘ये विशिष्ट लोग (एनजेएसी का हिस्सा) सलाहकार हो सकते हैं, लेकिन उन्हें वोट नहीं करना चाहिए।’
नरीमन का कहना था कि ब्रिटेन ने जजों की भर्ती में कॉलेजियम सिस्टम का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि यह बेस्ट विकल्प था। हालांकि, उन्होंने कॉलेजियम सिस्टम को सुधारने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि यह सिस्टम पब्लिक और मीडिया के लिए ‘बंद दुकान’ की तरह नहीं हो जाए।

उन्होंने सर्वोच्च अदालत से उस प्रावधान को भी खत्म करने का अनुरोध किया, जिसमें रिटायरमेंट के बाद किसी भी जज पर उनके कार्यकाल के दौरान की गई गड़बड़ियों के लिए कार्रवाई नहीं किए जाने की बात है। उन्होंने कहा, ‘यह काफी गलत संदेश देता है। आप सिस्टम को कैसे सुधारेंगे? अगर आपके पास ही कुछ सड़े अंडे हों, तो उनमें आपको कानून का डर पैदा करना होगा।’

नरीमन ने सरकार की उस दलील का जमकर विरोध किया कि राष्ट्रपति इस मामले में कैबिनेट की सलाह को मानने के लिए बाध्य हैं। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के साथ सलाह संविधान की बुनियादी बात है। नरीमन ने कहा कि संविधान निर्माता बी. आर. आंबेडकर किसी एक धड़े को खासतौर पर यह अधिकार नहीं देना चाहते थे। इस पर जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा, ‘इसलिए उन्हें सबसे कम खतरनाक धड़े को यह अधिकार दिया।’ नरीमन ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि अदालत के पास न तो आर्मी है और न ही पुलिस।

Leave a comment

XHTML: You can use these tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>