FSSAI के निशाने पर अब नमक, चीनी व फैट, इनके उपयोग की सीमा होगी तय
By dsp On 19 Jun, 2015 At 05:42 PM | Categorized As व्यापार | With 0 Comments
hotel_1434720450Source :(money.bhaskar.com)
नई दिल्ली। मैगी विवाद के बाद देश का खाद्य नियामक फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) खासा सक्रिय नजर आ रहा है। इस क्रम में एफएसएसएआई के रडार पर अब नमक, चीनी और फैट भी आ गए हैं। खाद्य नियामक जल्द ही खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले नमक, चीनी और फैट की मात्रा के लिए दिशा-निर्देश जारी करेगा। इस मामले को देखने के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन भी कर दिया गया है।
नियामक ने माना-खाद्य पदार्थों की बारीकी से जांच की जरूरत
एफएसएसएआई ने अपने आदेश में कहा, ‘इस संबंध में जहां दिशानिर्देश अलग से जारी किए जा रहे हैं, वहीं माना जा रहा है कि इस मामले में सभी खाद्य पदार्थों की बारीकी से जांच किए जाने की जरूरत है। इसलिए भारत में खाद्य पदार्थों में नमक, चीनी और फैट के इस्तेमाल पर एक विशेषज्ञ समूह के गठन का फैसला किया गया है।’
11 सदस्यों के पैनल का किया गठन
एफएसएसएआई द्वारा बनाए गए 11 सदस्यों वाले पैनल में डॉक्टर, डेंटिस्ट और एम्स तथा राम मनोहर लोहिया अस्पताल व अन्य कई संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। आदेश के मुताबिक ईटिंग ज्वाइंट्स और खानपान केंद्रों पर बिकने और परोसे जाने वाले खाद्य पदार्थों में फैट, चीनी और नमक की मात्रा के प्रदर्शन के लिए नियम बनाने से संबंधित सिफारिशें देगा।
दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही दे चुका है आदेश
एफएसएसएआई ने कहा कि जंक फूड में फैट, चीनी और नमक की मात्रा कुछ ज्यादा ही होती है, जिसका सेहत पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव खासा चिंता का विषय है। नियामक ने कहा, ‘दिल्ली उच्च न्यायालय ने एफएसएसएआई को स्कूली बच्चों के मामले में दिशानिर्देश जारी करने का आदेश दिया था।’
मैगी पर हो चुका है देश में बवाल
हाल में मैगी में लेड की सीमा से ज्यादा मात्रा मिलने का मामला सामने आने के बाद देश भर में बवाल मच गया था। कई राज्य सरकारों द्वारा कार्रवाई किए जाने के बाद केंद्र सरकार की खाद्य सुरक्षा एजेंसी एफएसएसएआई को नेस्ले इंडिया के इस उत्पाद की बिक्री पर बैन लगाना पड़ा था। नेस्ले इंडिया ने मैगी के 320 करोड़ रुपए के माल को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी।

 

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