सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को नहीं मिली बेल, लेकिन बैंक गारंटी मंंजूर
By dsp On 19 Jun, 2015 At 05:23 PM | Categorized As व्यापार | With 0 Comments
Sour: jagran
19_06_2015-saharaनई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें तुरंत जमानत देने से इन्कार कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा पेश किए गए बैंक गारंटी फॉर्मेट को मंजूर कर लिया है। साथ ही सहारा प्रमुख को जेल में मिली ऑफिस सुविधा को 6 हफ्ते के लिए बढ़ा दिया है, ताकि वो अपनी संपत्तियों की बिक्री के लिए संभावित खरीदारों से डील कर सकें। सहारा को निवेशकों की बकाया राशि को 9 किश्तों में देने का सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। बाजार नियामक सेबी को 10,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने के बाद ही उन्हें (सुब्रत राय को) जमानत मिल सकेगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर सहारा की ओर से दी गई बैंक गारंटी को सेबी मंजूर कर लेता है तो सहारा प्रमुख को जमानत दे दी जाएगी। लेकिन सुब्रत रॉय जेल से बाहर आकर दस दिनों के अंदर सेबी को 3,000 करो़ड़ रुपये जमा कराएंगे।
इसके बाद हर दो महीने में उन्हें 3-3 हजार करोड़ रुपये 9 किश्तों में देने होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर लगातार दो किश्ते नहीं जमा कराई जाती है तो सुब्रत रॉय को सरेंडर करना होगा नहीं तो उन्हें गिरफ्तार कर फिर जेल भेज दिया जाएगा। साथ ही जेल से बाहर आने के बाद रॉय को हर रोज दिल्ली पुलिस को अपनी रिपोर्ट सौंपेगे।
भारत में भी कहीं आने-जाने के लिए उन्हें पुलिस को जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सहारा की संपत्ति की बिक्री पर लगी रोक को हटा दिया। सुनवाई के दौरान जब सहारा के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को कहा कि जमानत के लिए 5000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी की जगह सिर्फ 4000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी का इंतजाम ही हो पाया है तो कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा है तो 5000 करोड़ रुपये की जगह 6000 करोड़ रुपये नगद जमा करा दो। लेकिन सारा आदेश होने के बाद सहारा के वकील ने कोर्ट को कहा कि बैंक गारंटी देनेवाला बैंक अब मना कर रहा है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत रॉय को वापस तिहाड़ में रखने और जेल में मिली गेस्ट हाउस सुविधा को 8 हफ्तों के लिए बढा़ देने का आदेश दे दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राय की रिहाई की तारीख से सहारा द्वारा सेबी को 18 माह में 36,000 करोड़ रुपये 9 किस्तों में देने हैं।
पहली किश्त 3,000 करोड़ रुपये की होगी और दो बार चूक करने पर सेबी, सहारा द्वारा दी गई बैंक गारंटी को भुना सकता है। भुगतान के संबंध में अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया जाता तो राय को समर्पण करना होगा। राय और सहारा के जेल में बंद दो अन्य निदेशकों को रिहा होने पर अपने पासपोर्ट जमा करने होंगे और वे देश से बाहर नहीं जा सकेंगे।
न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद राय के वकील ने 5,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने में मुश्किल जताई। न्यायालय ने रिहाई के लिए राशि की व्यवस्था करने की खातिर तिहाड़ जेल में राय को जेल में मिली सुविधाओं की अवधि 6 सप्ताह तक बढ़ाई है। न्यायालय ने कहा कि देश में कहीं भी आने-जाने के बारे में राय को दिल्ली पुलिस को अवगत कराते रहना होगा। रॉय पिछले 15 महीनों से तिहाड़ जेल में बंद है। कोर्ट ने उन्हें मार्च 2014 में निवेशकों के 24,000 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया था जिसे पूरा करने में समूह नाकाम रहा। सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल स्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग फाइनैंस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने साल 2007-08 के दौरान निवेशकों से 24,000 करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए थे। कोर्ट ने सहारा को यह रकम 15 फीसद ब्याज के साथ निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सहारा को बाजार नियामक सेबी के पास 10,000 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया है। इसमें 5,000 करोड़ रुपये नगद और 5,000 करोड़ रुपये बैंक गारंटी के रूप में देना है।
इसके अलावा कोर्ट ने कहा है कि जमानत मिलने के 18 महीने के अंदर सहारा को सेबी के पास 36,000 करोड़ रुपये कुल नौ किस्तों में जमा कराने होंगे। शुरुआती दो महीनों में यह किस्त 3000 करोड़ रुपये की होगी। सुब्रत रॉय और अन्य आरोपियों को उनके पासपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है। जमानत की तारीख पर सुप्रीम कोर्ट ही फैसला करेगा।

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