माह-ए-रमजान, पाक महीने की दस्तक के साथ शुरू हुआ इबादत का दौर
By dsp On 19 Jun, 2015 At 06:20 PM | Categorized As धर्म-अध्यात्म | With 0 Comments

19_06_2015-ram2इलाहाबाद । तीसवीं शाबान के खत्म होते ही रमजान के पाक महीने का आगाज हो गया। शुक्रवार को रोजेदार पहला रोजा रखेंगे और इसी के साथ शुरू हो गाया इबादत का दौर। बड़े-बूढ़ों के साथ महिलाएं और बच्चे भी रोजा रखने को तैयार हैं। सुबह सहरी कर वह दिन भर रोजा रख पाक परवरदिगार की इबादत करेंगे।
रमजान शुरू होने से एक रोज पहले ही रोजेदारों के लिए बाजार सज गए थे। देर रात तक खरीदारी का दौर चलता रहा। चौक, घंटाघर, अटाला और रोशन बाग के बाजारों की रौनक तो देखने लायक थी। शाम को ईशा की नमाज के बाद मस्जिदों में ताराबीह हुई। फिर घरों में सूतफेनी और मिठाइयों को लाकर रखा गया। रसोईघरों को सहरी बनाने के लिए पाक-साफ किया गया। देर रात तक मुस्लिम इलाकों में चहल-पहल बनी रही। मौलानाओं ने इस दौरान फरमाया कि हर मुसलमान के लिए फर्ज है रोजा। रोजा रखने से बरकत होती है। इस दौरान की गई एक नेकी का सौ गुना सवाब मिलता है। लिहाजा रमजान के पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत करनी चाहिए और गरीबों और मजलूमों की मदद करनी चाहिए।

हर मुसलमान पर फर्ज है रोजा

19_06_2015-ramdanmubarakइस्लाम के चार अहम रुक्नों में तीसरा रुक्ना रोजा है। सन दो हिजरी में रोजा मुसलमानों पर फर्ज करार दिया गया है। रोजा बंदों की प्यारी इबादत है खुदा की बारगाह में। एक हदीस में आया है कि सारी इबादतों का बदला खुदा अपने फरिश्तों के हाथों अता फरमाता है, लेकिन रोजा वह इबादत है जिसका बदला खुदा खुद अपने बंदों को बराहे रास्ते (बगैर किसी माध्यम) के अता करेगा। इस महीने में एक रात ऐसी है जिसमें की गई इबादत हजार महीनों में की गई इबादत से कहीं बेहतर है। जब यह महीना आता है अल्लाह आसमान के दरवाजे खोल देता है। इसी तरह वह जन्नत के दरवाजे भी खोल देता है। बंदों पर रहमतों की बरसात होती है। जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। शैतानों को जंजीरों में जकड़ दिया जाता है। ऐसे में मुसलमान और महीनों के बजाय इस महीने में खुदा की इबादत कुछ ज्यादा ही करते हैं।

Source: Jagran

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